Wednesday, June 6, 2012

हर बातों में हम होते हैं

यूँ सबके हमदम होते हैं
दुख के दिन में कम होते हैं

साथ निभाये जो आफत में
लोग वही मरहम होते हैं

शायर चलता लीक छोड़कर 
उसके यही नियम होते हैं

जो टकराते वक्त से जितना
वही असल दमखम होते हैं

जहँ टूटता दिल अपनों से 
आँखों में शबनम होते हैं

जैसी फितरत इन्सानों की
वैसे ही मौसम होते हैं 

सुमन करे चर्चा औरों की 
हर बातों में हम होते हैं

14 comments:

dheerendra said...

वाह,,,,क्या बात है बहुत सुंदर गजल,,,,

MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

Shah Nawaz said...

Waah!!! Behtreen gazal...

Neeraj Rohilla said...

सुन्दर प्रस्तुति,
पढकर बहुत अच्छा लगा।

गुड्डोदादी said...

जहँ टूटता दिल अपनों से

आँखों में शबनम होते हैं

घायल

बिन बादल बरसात होते हैं

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

शायर चलता लीक छोड़कर
उसके यही नियम होते हैं..kya baat hai sumanjee....

प्रवीण पाण्डेय said...

भई वाह, पढ़कर आनन्द आ गया।

Anupama Tripathi said...

जो टकराते वक्त से जितना
वही असल दमखम होते हैं

bahut sundar ...

दर्शन कौर धनोय said...

जहँ टूटता दिल अपनों से
आँखों में शबनम होते हैं

जैसी फितरत इन्सानों की
वैसे ही मौसम होते हैं

bahut sunder ....

Suresh kumar said...

Bahut hi khubsurat rachna....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 08/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

yashoda agrawal said...

हर बातों में हम होते हैं
सुन्दर शुरुवात
ऐसी ही रचनाएँ पढ़वाते रहें

***Punam*** said...

साथ निभाये जो आफत में
लोग वही मरहम होते हैं !

बस.....ऐसे लोग कम होते हैं.....!!
बहुत सुंदर......!!

Sidharth Sarthi said...

सचमुच जहाँ टूटता दिल अपनो का , आँखो मेँ शबनम होते हैँ ।
और ये पूरक पँक्ति हिम्मत देती है -
जो टकराते वक्त से जितना . . . . . . . . . . !!
.
एक पँक्ति याद आती है कि -
वो कितना बदनसीब है ,
गम ही जिसे मिला नहीँ ।।

manish said...

very good

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