Saturday, August 4, 2012

जीने का अन्दाज वही

जिनसे मैंने जीना सीखा, खड़ा दूर क्यों आज वही
हुई कभी ना ऊँची बातें, है आँखों में लाज वही

पहले जो अपनापन पाया, बाहर से दिखता वैसा
अन्दर कुछ बदला सा क्यूँ है, बतलायेगा राज वही

बदल रहे तारीख हमेशा, सालों साल महीनों में
लगा रहा रोटी पाने को, खड़ा सामने काज वही

बिगड़ गए हालात देश के, जिनसे पूछो, वे कहते
खुद को जब कुछ करना पड़ता, मुर्दानी आवाज वही

प्रगतिवाद का पोषक बनकर, परिवर्तन की बात करे
लेकिन घर में देख रहा हूँ, जीने का अन्दाज वही

बदल रहे इन्सानी रिश्ते, आपस का विश्वास घटा
समझ न पाया क्यूँ ऊपर से, दिखता सतत समाज वही

क्या अच्छा है और बुरा क्या, सबको सब समझाते हैं
चाहे जो अंजाम सुमन का, बेहतर सा आगाज वही

17 comments:

Sunil Kumar said...

बिगड़ गए हालात देश के, जिनसे पूछो, वे कहते
खुद को जब कुछ करना पड़ता, मुर्दानी आवाज वही
सही कहा आपने ,बहुत सुंदर बधाई

Rajesh Kumari said...

बहुत बढ़िया शानदार प्रस्तुति

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत सुन्दर गजल सर....
सादर.

विभूति" said...

खुबसूरत अभिवयक्ति......

Yashwant R. B. Mathur said...

कल 06/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

गुड्डोदादी said...

जिनसे मैंने जीना सीखा, खड़ा दूर क्यों आज वही
हुईं कभी ना ऊँची बातें, है आँखों में लाज वही

बिहल वेदना सारी गजल

सुंदर गीत गजल लिखते हो रफ़्तार में ना आये कमी
जीवन में कुछ भी हो जाए कलम ना बेचना कभी

प्रवीण पाण्डेय said...

अत्यन्त प्रभावी अभिव्यक्ति..

kshama said...

जिनसे मैंने जीना सीखा, खड़ा दूर क्यों आज वही
हुईं कभी ना ऊँची बातें, है आँखों में लाज वही
Bahut hee sundar!

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत ख़ूब!
आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 06-08-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-963 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

Saras said...

बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल .....!

udaya veer singh said...

बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल .....!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सच्चाई को कहती खूबसूरत गजल

रेखा श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर ग़ज़ल , यथार्थ के करीब.

Vinay said...

वाह जी वा...

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Sanju said...

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

***HAPPY INDEPENDENCE DAY***

nawab said...

नमस्ते अंकल,
यहाँ मैं जीवन की कड़वी सच्ची बातों का अवलोकन ही नहीं देख रहा हूँ:
"जिनसे मैंने जीना सीखा, खड़ा दूर क्यों आज वही"

बल्कि कुछ निष्कर्ष:
"बतलायेंगे राज वही"

और कुछ सीख भी
"चाहे जो अंजाम सुमन का, लेकिन है आगाज वही"

nawab said...
This comment has been removed by the author.
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