Thursday, September 20, 2012

बस उलझन की बात यही है

किसकी गलती कौन सही है
बस उलझन की बात यही है

हंगामे की जड़ में पाया
कारण तो बिलकुल सतही है

सब आतुर हैं समझाने में
मीठा कितना अपन दही है

सीना तान खड़े हैं जुल्मी
ऐसी उल्टी हवा बही है

है इन्साफ हाथ में जिनके
प्रायः मुजरिम आज वही है

हम सुधरेंगे जग सुधरेगा
इस दुनिया की रीति यही है

कुछ करके ही पाना संभव
सुमन पते की बात कही है

6 comments:

Sunil Kumar said...

कुछ करके ही पाना संभव
सुमन पते की बात कही है
बहुत सुंदर क्या बात हैं

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत पते की बात कही है।

expression said...

सचमुच पते की बात......
सुन्दर...

अनु

गुड्डोदादी said...


है इन्साफ हाथ में जिनके
प्रायः मुजरिम आज वही है
(क्या संभव है )

जब न्याय यहाँ बिकता हो
देश की चिंता नहीं रही

Vinay Prajapati said...

उत्कृष्ट कृति

--- शायद आपको पसंद आये ---
1. अपने ब्लॉग पर फोटो स्लाइडर लगायें

आशा जोगळेकर said...

सीना तान खड़े हैं जुल्मी
ऐसी उल्टी हवा बही है

है इन्साफ हाथ में जिनके
प्रायः मुजरिम आज वही है

हम सुधरेंगे जग सुधरेगा
इस दुनिया की रीति यही है



जो भी बातें कहीं आपने
कहना बिलकुलसही सही है ।

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