Wednesday, November 20, 2013

अपनी भी परछाई देख

सब में नहीं बुराई देख
अपनी भी परछाई देख

बर्बरता के इस युग भी
जहाँ तहाँ अच्छाई देख

जहाँ मुहब्बत वहीं जिन्दगी
कुछ क्यों हैं सौदाई देख

भूल रहे जो अनुशासन को
ऐसी आज पढ़ाई देख

है पड़ोस में मातम फिर भी
बजा रहे शहनाई देख

मधुमेह के हैं रोगी पर
खाते खूब मिठाई देख

करे मंच से गलत बयानी
देते वही सफाई देख

लोगों का हित करने आए
करते कहां भलाई देख

लिखा वही, हालात सामने
सुमन हृदय सच्चाई देख

2 comments:

Rajendra kumar said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति 22-11-2013 चर्चा मंच पर ।।

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

कल 23/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!