Friday, January 17, 2014

कौन यहाँ पर कातिल है

भले सितारे हो गर्दिश में मगर सितारों पे दिल है
पता नहीं रखवाला मेरा कौन यहाँ पर कातिल है

नदी अगर दुनिया को कहते जीवन है उसका पानी
मस्त जिन्दगी धारा जैसी सुख दुख दोनो साहिल है

चलते फिरते कठपुतली सी होठों पे मुस्कान लिए
भागमभाग मची आपस में पता नहीं क्या मंजिल है

रंग बिरंगे परिधानों में गाजे बाजे बजा रहे
भाव मशीनों के जैसा तो सूनी सूनी महफिल है

सुन लेते जो गौर से अक्सर ऐसे लोग कहाँ मिलते
सुमन बोलकर साबित करता बाकी दुनिया जाहिल है

8 comments:

Yashwant Yash said...

कल 19/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !

प्रवीण पाण्डेय said...

नहीं ज्ञात है, कौन क्या है।

शारदा अरोरा said...

bahut sundar...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
पोस्ट को साझा करने के लिए आभार।

Kaushal Lal said...

परत दर परत मुखौटा चढ़ा है ....

dr.mahendrag said...

नदी अगर दुनिया को कहते जीवन है उसका पानी
मस्त जिन्दगी धारा जैसी सुख दुख दोनो साहिल है

चलते फिरते कठपुतली सी होठों पे मुस्कान लिए
भागमभाग मची आपस में पता नहीं क्या मंजिल है
पता नहीं फिर भी हर कोई भाग रहा है.कौन कहाँ जा रहा है शायद खुद को खबर नहीं.सुन्दर ग़ज़ल.

dr.mahendrag said...

नदी अगर दुनिया को कहते जीवन है उसका पानी
मस्त जिन्दगी धारा जैसी सुख दुख दोनो साहिल है

चलते फिरते कठपुतली सी होठों पे मुस्कान लिए
भागमभाग मची आपस में पता नहीं क्या मंजिल है
पता नहीं फिर भी हर कोई भाग रहा है.कौन कहाँ जा रहा है शायद खुद को खबर नहीं.सुन्दर ग़ज़ल.

vikram pratap singh said...

Bahut Umda!!

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