Wednesday, May 21, 2014

संघम् शरणम् गच्छामि

आयी इक नयी बयार संघम् शरणम् गच्छामि
चुन ली हमने सरकार संघम् शरणम् गच्छामि

पहले जो शासक आए हालात बदल ना पाए
क्या होगा अभी सुधार संघम् शरणम् गच्छामि

आँखों में आँसू भरते और अच्छी बातें करते
क्या बदलेगा व्यवहार संघम् शरणम् गच्छामि

रोटी की जिन्हें जरूरत वे देंगे देख मुहुरत
क्या भूखे से व्यापार संघम् शरणम् गच्छामि

शासक जो अबतक भागे क्या होता देखो आगे
क्या बने सुमन लाचार संघम् शरणम् गच्छामि

3 comments:

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (23.05.2014) को "धरती की गुहार अम्बर से " (चर्चा अंक-1621)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

मन के - मनके said...

आशा रखें---आसहीन जीवन सूखी खेती है.

सुनील गज्जाणी said...

aap ke blog par aana sukhad laaga , umdaa rachnaaye , namskar

हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!