Tuesday, October 21, 2014

रंग तुम्हारा होगा

वैसे दिन की आस लगी जब संग तुम्हारा होगा
जीवन तो मेरा होगा पर रंग तुम्हारा होगा
हुईं हैं बातें नजरों से पर होठों पर हैं ताले क्यों
आस सुमन को मौन एकदिन भंग तु्म्हारा होगा

जीवन इक संघर्ष हमारा, कर्तव्यों में खो जाएं
पूरा काम लगन से करके, चलो रात में सो जाएं
आसानी से राह कटे गर सँग सुमन के प्रियतम हो
जीने खातिर कल को फिर से, इक दूजे के हो जाएं

शादी के पहले प्रेमी - जन, इक दूजे पे मरते हैं
मगर बाद में सच पूछो तो इक दूजे से डरते हैं
नाप-तौल से दूर बहुत है सुमन प्रेम की ये दुनिया
देख परिन्दे भी सिद्दत से प्यार किया करते हैं

कभी भलाई के बदले की ख्वाहिश मत करना
भले जख्म अपना दे कोई रंजिश मत करना
दुनिया सिर्फ मुहब्बत से है और मुहब्बत दुनिया
मिलेंगे काँटे मगर सुमन से साजिश मत करना

1 comment:

Prabhat Kumar said...

सुन्दर प्रस्तुति...........दीवाली की हार्दिक शुभकामनायें! मेरी नयी रचना के लिए मेरे ब्लॉग "http://prabhatshare.blogspot.in/2014/10/blog-post_22.html" पर सादर आमंत्रित है!

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