Sunday, April 30, 2017

दिन का सूरज कैद में

रात अँधियारे में अपनी दिन का सूरज कैद में
जो रचा दुनिया को वो भी बन के मूरत कैद में

एक ही दुनिया में जी कर ढंग सबके हैं अलग
दूसरों की फिक्र कुछ को कुछ की नीयत कैद में

टूटते सपनों को यारो जोड़ना तू सीख ले
एकता किस्मत हमारी और किस्मत कैद में

जंग सरहद पर अगर तो खेत में भी जंग है
इक शहादत याद करते इक शहादत कैद में

दूर तक देखो तो लगता आसमाँ झुकता सुमन
खुद झुका ले आसमाँ क्या तेरी ताकत कैद में

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