Sunday, April 30, 2017

या रोने की फिर बारी है

अच्छे दिन की तैयारी है
या रोने की फिर बारी है

क्यों दशकों से छले गए हम
नादानी या लाचारी है

वादे बदले, शासक बदला
जनता अबतक बेचारी है

कौन धरम है ऊंचा, नीचा
इस पर भी मारामारी है

मानवता भी गयी रसातल
यह आयोजन सरकारी है

दहशतगर्दी बढती जाती
कारण घर घर बेकारी है

लूटा जिसने देश अभीतक
नेता, मंत्री, अधिकारी हैं

इसे कहें क्यों सहनशीलता
सच पूछो तो बीमारी है

अब तो जागो देशवासियों
सुमन व्यवस्था हत्यारी है

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