Thursday, April 28, 2011

मँहगी रोटी - सस्ती कार

सोने की चिड़िया कभी, अपना भारत देश।
अब के जो हालात हैं, सुमन हृदय में क्लेश।।

मँहगी रोटी हो रही, लेकिन सस्ती कार।
यही प्रगित की माप है, समझाती सरकार।।

भूखे हैं बहुजन यहाँ, उनके छत आकाश।
संकट में सब खो रहे, जीने का विश्वास।।

देख क्रिकेटर को मिले, रुपये कई करोड़।
लाख शहीदों के लिए, हाल दुखद बेजोड़।।

प्रायः सब कहते सफल, अन्ना का अभियान।
असल काम तो शेष है, भ्रष्टों की पहचान।।

11 comments:

rajendra awasthi said...

"मँहगी रोटी - सस्ती कार" बहुत अच्छी रचना,
कम शब्दों में ज्यादा कहने का प्रयास,
अति सुन्दर..

डॉ टी एस दराल said...

असल काम तो शेष है भ्रष्टों की पहचान।।

यथार्थ ।
बहुत सुन्दर ग़ज़ल ।

मनोज कुमार said...

देख क्रिकेटर को मिले रूपये कई करोड़।
लाख शहीदों के लिए हाल दुखद बेजोड़।।

बहुत अच्छा।

राज भाटिय़ा said...

देख क्रिकेटर को मिले रूपये कई करोड़।
लाख शहीदों के लिए हाल दुखद बेजोड़।।
आप की कविता की एक एक लाईन सत्य हे , बहुत सुंदर कविता, धन्यवाद

SAJAN.AAWARA said...

AAJ KE JAMANE KA SACH SAMNE LAYEN HAIN AAP. NICE POEM. DHANYWAD

प्रवीण पाण्डेय said...

दिशा यही तो खलती है।

रंजना said...

देख क्रिकेटर को मिले रूपये कई करोड़।
लाख शहीदों के लिए हाल दुखद बेजोड़।।

मन कितना क्षुब्ध होता है यह स्थिति देखकर शब्दों में बताना कठिन है...

सार्थक रचना भाई जी...

गुड्डोदादी said...

भूखे हैं बहुजन यहाँ उनके छत आकाश।
संकट में सब खो रहे जीने का विश्वास।।


दो टूक मिल जाएँ प्याज के साथ
समझो फिर जीना नहीं दुशवार

देख क्रिकेटर को मिले रूपये कई करोड़।
लाख शहीदों के लिए हाल दुखद बेजोड़।।

हम सभी जायेंगे यहीं छोड़

देवेन्द्र पाण्डेय said...

सभी दोहे बेहतरीन।

Madan Mohan Saxena said...

आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है .बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!
शुभकामनायें.

http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/

वीरेश अरोड़ा "वीर" said...

असल काम तो शेष है भ्रष्टों की पहचान।। बहुत ही उम्दा रचना !!

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