ओ प्रीतम ! ले के आ जा, चेहरे पे मुस्कान।
देहरी पे आस लगाये बैठी, आओ ना श्रीमान।
चहरे पे मुस्कान।।
तुमसे प्रीत लगी जब साजन, तेरे संग मैं आई।
मजबूरी में दूर हुए तुम, लगती प्रीत पराई।
देर करोगे, अब साजन तो लोगे मेरी जान।
चेहरे पे मुस्कान।।
तुम क्या जानो तुम बिन कैसे, वक्त हमारा बीता।
दिल में थी चाहत कि तुम संग, बन के जाऊँ सीता।
विरहन कि पीड़ा को कब तुम, समझोगे नादान।
चेहरे पे मुस्कान।।
मन की बातें चिट्ठी में सब, लिख न पाये कोई।
याद तुम्हारी जब जब आती, चुपके चुपके रोई।
आओ हार सुमन पहना दूं, पूरे हों आरमान।
चेहरे पे मुस्कान।।
ओ प्रीतम ! ले के आ जा, चेहरे पे मुस्कान।
देहरी पे आस लगाये बैठी, आओ ना श्रीमान।
चेहरे पे मुस्कान।।
Tuesday, January 10, 2012
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14 comments:
Bahut,bahut sundar!
तुमसे प्रीत लगी जब साजन, तेरे संग मैं आई।
मजबूरी में दूर हुए तुम, लगती प्रीत पराई।
प्यार की प्यास यही इक याद जीने की आस
मन की बातें चिट्ठी में सब, लिख न पाये कोई।
याद तुम्हारी जब जब आती, चुपके चुपके रोई।
बहुत ही गजब दार
वाह बस यही मुस्कान बनी रहे।
मन की बातें चिट्ठी में सब, लिख न पाये कोई।
याद तुम्हारी जब जब आती, चुपके चुपके रोई।
आओ हार सुमन पहना दूं, पूरे हों आरमान।
चेहरे पे मुस्कान।।
sunder panktiyan
badhai
rachana
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
श्यामल
आशीर्वाद
बहुत सुंदर रचना बधाई
आओ हार सुमन पहना दूं, पूरे हों आरमान।
यादों के सुमन और एहसास की खुशबू
बहुत ही बढ़िया सर!
सादर
आपको लोहड़ी की हार्दिक शुभ कामनाएँ।
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कल 13/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
सुन्दर....
शुभकामनाएँ.
मुस्कान के साथ इंतज़ार ..सुन्दर रचना
aise manuhar ko padh kar pritam ke chehre par muskaan ye aai ke vo aai.
achhi rachna.
shubhkamnayen
श्यामल जी पहले तो लोहड़ी और मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें.....
बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ....
बढ़िया लिखा बधाई...
मेरे ब्लॉग को पढने और जुड़ने के लिए
इस लिंक पे आने का निमंत्रण स्वीकार करें......
http://dilkikashmakash.blogspot.com/
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