Saturday, July 7, 2012

बेच रहे तरकारी लोग

प्रायः जो सरकारी लोग
आज बने व्यापारी लोग

लोकतंत्र में बढ़ा रहे हैं
प्रतिदिन ये बीमारी लोग

आमलोग के अधिकारों को
छीन रहे अधिकारी लोग

राजनीति में जमकर बैठे
आज कई परिवारी लोग

तंत्र विफल है आज देश में
भोग रहे बेकारी लोग

जय जयकार उन्हीं की होती
जो हैं अत्याचारी लोग

पढ़े लिखे भी अब सडकों पर
बेच रहे तरकारी लोग

मानवता को भूल, धर्म पर
करते मारामारी लोग

चमन सुमन का जल ना जाए
शुरू करें तैयारी लोग

12 comments:

Arvind Mishra said...

सचमुच यही दशा है

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत सुन्दर..........
गहन भाव और लय बद्ध भी...

अनु

Rajesh Kumari said...

तंत्र विफल है आज देश में
भोग रहे बेकारी लोग
बहुत सुन्दर सटीक लिखा है हर शेर सच्चाई बयां कर रहा है ...वाह

निर्मला कपिला said...

पढ़े लिखे भी अब सडकों पर
बेच रहे तरकारी लोग
सही बात हर शेर आज की कहानी कह रहा है।

गुड्डोदादी said...

पढ़े लिखे भी अब सडकों पर
बेच रहे तरकारी लोग

मानवता को भूल, धर्म पर
करते मारामारी लोग
आज की आत्मकथा का सच

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ढंग से धोया है आपने..

अजय कुमार झा said...

रविवारीय महाबुलेटिन में 101 पोस्ट लिंक्स को सहेज़ कर यात्रा पर निकल चुकी है , एक ये पोस्ट आपकी भी है , मकसद सिर्फ़ इतना है कि पाठकों तक आपकी पोस्टों का सूत्र पहुंचाया जाए ,आप देख सकते हैं कि हमारा प्रयास कैसा रहा , और हां अन्य मित्रों की पोस्टों का लिंक्स भी प्रतीक्षा में है आपकी , टिप्पणी को क्लिक करके आप बुलेटिन पर पहुंच सकते हैं । शुक्रिया और शुभकामनाएं

Kusum Thakur said...

देश की परिस्थिति को बयान करते हुए सभी शेर लाजवाब .....
"आज देश की हालत ऐसी
फिर क्या है लाचारी लोग "

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

क्या बात है वाह!
आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 09-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-935 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

Unknown said...

वाह क्या बात है.बहुत सुन्दर रचना.


मोहब्बत नामा
मास्टर्स टेक टिप्स

Amrita Tanmay said...

सुन्दरता से हालात को बयाँ किया है..

Asha Joglekar said...

सहे चले जा रहे ज्यादती
दिखा रहे लाचारी लोग ।


बढिया सटीक और सामयिक प्रस्तुति ।

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विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!