Sunday, November 8, 2015

तुम हमारे लिए हम तुम्हारे लिए

गीत गाते रहे गुनगुनाते रहे
याद करके तुम्हें मुस्कुराते रहे
तेरे सपने सभी मेरे अपने हुए
जिन्हें आँखों में अपनी सजाते रहे

कोशिशें पास जाने की जितना किया
दूर तुमने मुझे यार उतना किया
तेरी यादों का केवल सहारा मुझे
सोचता क्यूँ भला प्यार इतना किया

प्यार तुमसे किया और पागल हुआ
इक भटकता हुआ जैसे बादल हुआ
तेरी मुस्कान कायम सदा हो मगर
तेरी आँखों के आँसू से घायल हुआ

गीत जो भी लिखे हैं तुम्हारे लिए
उलझनें सब तुम्हारी हमारे लिए
तेरी आँखों के आंसू को पी ले सुमन
तुम हमारे लिए हम तुम्हारे लिए

5 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 10 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (10.11.2015) को "दीपों का त्योंहार "(चर्चा अंक-2156) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

Kavita Rawat said...

बहुत सुन्दर गीत ..
दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

JAY BARUA said...

बहुत खूब |

Rushabh Shukla said...


सुन्दर रचना ......
मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन की प्रतीक्षा है |

http://hindikavitamanch.blogspot.in/
http://kahaniyadilse.blogspot.in/

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विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!