Friday, April 17, 2015

बिखरा हुआ समाज दिखा

प्यार और नफरत समझाने का बेहतर अंदाज दिखा
बातें जितनी अच्छी करते उलट आंख में राज दिखा
जीव कई सामाजिक होते सर्वश्रेष्ठ आदम जिसमें
वन में नियम मगर मानव का बिखरा हुआ समाज दिखा
देखा,समझा,महसूसा भी दशकों से इस दुनिया को
हाल कभी ऐसा न देखा सचमुच जैसा आज दिखा
सेवक ही शोषण करते और शासन भी शीतल घर से
आज तलक उनकी आंखों में कभी न कोई लाज दिखा
आग लगी बाहर जलने दो अपना घर तो बचा हुआ
इस कारण से सुमन को शायद केवल अपना काज दिखा

5 comments:

कविता रावत said...

आग लगी बाहर जलने दो अपना घर तो बचा हुआ
इस कारण से सुमन को शायद केवल अपना काज दिखा
.. बहुत सटीक! हाल है .....अपनी बनी रही बस यही भूल किये जाते रहना दुखद पहलु हैं

कविता रावत said...

आग लगी बाहर जलने दो अपना घर तो बचा हुआ
इस कारण से सुमन को शायद केवल अपना काज दिखा
.. बहुत सटीक! हाल है .....अपनी बनी रही बस यही भूल किये जाते रहना दुखद पहलु हैं

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपको सूचित किया जा रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शनिवार (18-04-2015) को "कुछ फर्ज निभाना बाकी है" (चर्चा - 1949) पर भी होगी!
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar said...

सटीक रचना

गुड्डोदादी said...

सेवक ही शोषण करते और शासन भी शीतल घर से

आग लगी बाहर जलने दो अपना घर तो बचा हुआ
ऐसा क्या पहली बार दिखा

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