Monday, June 27, 2022

सबको नाच नचाएगा

रामचन्द्र कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा।
चुनकर जो राजा आएगा, सबको नाच नचाएगा।।

राज सभा में चारण के सँग, होंगे मंत्री अज्ञानी।
लोकतंत्र कहने को होगा, करेंगे राजा मनमानी।
जिसके वादे जितने झूठे, वोट वही ले जाएगा।।
चुनकर जो राजा -----

संत वेष में चोर उचक्के, शासक के प्यारे होंगे।
जो करीब राजा के उनके, वारे और न्यारे होंगे।
लाठी लेकर आमजनों को, वही लोग हरकाएगा।।
चुनकर जो राजा -----

मुद्दा केवल मंदिर, मस्जिद, रोज बढ़ेगी मँहगाई।
आपस में नफरत फैलेगी, लड़ेंगे भाई सँग भाई।
घायल होगा चमन हमारा, सुमन रोज मुरझाएगा।।
चुनकर जो राजा -----

Wednesday, June 22, 2022

दिल में दर्द बहुत होता

जो विवेक से जीवन जीते, उनका फर्ज बहुत होता
उनके आँगन उगे जो काँटे, दिल में दर्द बहुत होता

समय समय पर हँसना, गाना, रोना पड़ता जीवन में
जो आँसू, मुस्कान खास हों, उसका अर्थ बहुत होता 

जिससे अपनापन होता है, उसे प्यार अनजाने भी 
वही प्यार कारण जो उसके, मन में दर्प बहुत होता 

आएंगे, जाएंगे हम सब, बची रहे तहजीब मगर 
सन्तानों पर मातु पिता का, सच में कर्ज बहुत होता

किसकी अपनी मर्जी से कब, दुनिया चलती रोज सुमन 
अपने जब विपरीत दिखे तो, घायल मर्म बहुत होता

Saturday, June 18, 2022

पूछे जिन्दा लोग ही

जनता पिसती जा रही, शासक है आबाद।
करते पैदा डर अभी, सरकारी उत्पाद।।

केवल बातों से कहाँ, बदला कब परिवेश?
अग्नि-वीर की आग में, लगा सुलगने देश।।

जब शासक हो सनक में, शासन टेढ़ी खीर।
अग्नि-वीर की योजना, लाए जुमला-वीर।।

भूख, गरीबी, नौकरी, बात दबी रह जाय।
इसीलिए बस धर्म की, रोज आग सुलगाय।।

सदियों से हम साथ में, कहाँ गया वह मेल?
मन्दिर, मस्जिद का हुआ, शुरू नया नित खेल।।

सुख - दुख अपना एक है, जी लेंगे हम साथ।
गड़बड़ जब शासन गया, अधिनायक के हाथ।।

कलम सुमन इक हाथ में, दूजे हाथ मशाल।
पूछे जिन्दा लोग ही, जलते हुए सवाल।।

अगर आज से अच्छा कल हो

गाँव, शहर हो या जंगल हो
होश भरा अपना पल पल हो

कहते जीत बड़ी वो होती
अगर आज से अच्छा कल हो

वो समाज आगे बढ़ता क्या
लोग जहाँ के विवश, विकल हो

माटी सबकी, देश सभी का
क्यूँ नफरत की यहाँ फसल हो

संविधान से राज चलेगा
भले दलों का जो दलदल हो

है समाज तो हम जी लेते
प्रेम आपसी सदा अचल हो

कुछ भी बाहर नहीं प्रेम से
सुमन इरादा यही अटल हो

सभी काम के दाम मुसाफिर

जितना जिसका काम मुसाफिर
उतना उसका नाम मुसाफिर
वक्त करे इन्साफ, किसी को
मत करना बदनाम मुसाफिर

          सभी काम के दाम मुसाफिर
          मिल जाता परिणाम मुसाफिर
          चाहो तो जीसस, अल्ला संग
          मिल सकते हैं राम मुसाफिर

जब आजीवन काम मुसाफिर
हर दिन सुबहो शाम मुसाफिर
फिर भी बहुत निठल्ले करते
बेच लाज विश्राम मुसाफिर

          शीत कहीं तो घाम मुसाफिर
          पर करना नित काम मुसाफिर
          करना पक्ष सबल जीवन के
          जितने भी आयाम मुसाफिर

हुए कई गुलफाम मुसाफिर
लगभग सब नाकाम मुसाफिर
चमन सजाया वही लगन से
जिसका सच्चा काम मुसाफिर

          चाहे दक्षिण, वाम मुसाफिर
          भले अलग आयाम मुसाफिर
          काम करो मिल भारत खातिर
          तभी सुखद परिणाम मुसाफिर

भले शहर या गाम मुसाफिर
सभी देश के नाम मुसाफिर
चलो सुमन संग मुल्क बनाने
करो नया नित काम मुसाफिर
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