Friday, January 13, 2023

फिर पतंग बन के उड़ जा

पहले  जीवन  से  तू जुड़ जा
फिर पतंग बन के  तू उड़ जा 
ऊँचा उड़ कर  देख  धरा  को
लेकिन फिर नीचे को मुड़ जा 

     ऊँची  सोच,  उठाता   जीवन
     सपने  भी  दिखलाता  जीवन
     मन  पतंग  बन  बहके   जैसे 
     अंकुश  उसे   लगाता  जीवन

श्रम  करके  हक  पाना होगा 
बिछुड़े  को   अपनाना  होगा
मन  पतंग  की  डोर  न  छूटे
इस  पर  ध्यान  लगाना होगा

     मन, पतंग  तो   लगे  एक  है
     उड़ने   के   जज्बे  अनेक  हैं
     बहके  नहीं  कदम  उड़ने  में
     करे  नियंत्रित  जो  विवेक  है

नहीं  डोर  तू  काट  कभी भी
नहीं  घृणा  तू  बाँट  कभी भी
सुमन  अगर  जीवंत, घटे क्यूं
फिर खुशबू की ठाट कभी भी

Monday, January 2, 2023

भजो राम का नाम

भूख लगी तो चुप रहो, क्यों करते बदनाम?
चाहत यही निजाम की, भजो राम का नाम।।

मँहगाई सिखला रही, सह लेने की सीख।
कुछ सरकारी भीख से, दबा रहे हैं चीख।।

भटक रहे युव-जन अभी, बिना काम बेकार।
इधर बनाता मीडिया, नफरत का बाजार।।

सभी धरम के मूल में, मानवता का मर्म।
लेकिन भूखों के लिए, रोटी पहला धर्म।।

आपस में भूखे लड़ें, धरम नाम पर भाय।
खेल सियासी है यही, नित रिश्ते चटकाय।।

खेले जाएंगे अभी, कई सियासी चाल।
कितने दिन तक हम बनें, मूरख या वाचाल??

नफरत की आँधी मगर, सुमन हाथ में दीप।
अंधकार जो है घना, करना उसे प्रदीप।।

पल पल नये सवाल

यूँ तो  पल पल  है  नया, पल पल नये सवाल।
भगवन्  नूतन - वर्ष  में,  सभी  रहें  खुशहाल।।

काल - खण्ड  इक मापनी, गिनते लोग जरूर।
यादों   में  वो  करम  से,  गये   जो  हमसे  दूर।।

चुन  चुन  अच्छे   शब्द  से, बाँटे  सब  सन्देश।
बिना  करम  या भाव  के, लगता  पर-उपदेश।

जीवन   में   सबके  लिए,  शेष   सदा   संघर्ष।
संघर्षों   से   जूझकर,   पाते    कुछ    उत्कर्ष।।

उजियारा   दिन  में  अगर,  आगे  काली  रात।
इक दिन दो दिन की नहीं, जीवन भर की बात।।

खुशियाँ  पाने  के  लिए,  करना  पड़ता  काम।
कर्म - हीन   हर   लोग  से,   रूठे   रहते  राम।।

नये  साल  में  करम  से,  कर   लेना  अनुबंध।
सुमन, पसीना  में  सदा, तुमसे  अधिक सुगंध।।

मौत देखकर जीना सीखो

अभी जिन्दगी जारी अपनी
मगर मौत से यारी अपनी

जीना जबतक हँसकर जीना
कर ले यूँ तैयारी अपनी

दोनों कल में क्यों उलझें हम
आज रात भी सारी अपनी

मौत देखकर जीना सीखो 
इक दिन होगी बारी अपनी 

जीवन में संघर्ष सभी को
नहीं दिखा लाचारी अपनी

सामाजिक परिवेश नेक हों
इस पर हो मुख्तारी अपनी

होश रखो तो हर पल नूतन
सुमन जिन्दगी प्यारी अपनी

Tuesday, December 20, 2022

मुहब्बत जगत में बड़ी बंदगी है

ये धरती हमारी तो गगन भी हमारा।
हकीकत हमारी तो सपन भी हमारा।।

जलता है सूरज तो चंदा है शीतल।
तजुर्बा सिखाता क्या सोना है पीतल।
शिखर से ही होता है पतन भी हमारा।
ये धरती हमारी -----

ये जीवन के रस्ते आसां नहीं है।
जिसे हौसला वो परेशां नहीं है।
सभी मुश्किलों पर है नयन भी हमारा।
ये धरती हमारी -----

मिल के बढ़ें सब यही जिंदगी है।
मुहब्बत जगत में बड़ी बंदगी है।
चमन ये हमारा तो सुमन भी हमारा।
ये धरती हमारी -----
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