Thursday, September 27, 2018

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि

प्रायः हम सभी,
मौत से डरते हैं और
यह भी सच है कि
एक ना एकदिन मरते हैं।

गीता कहती है, आत्मा को,
ना तो शस्त्र काट सकता, ना हवा सुखा सकती है,
ना पानी गला सकता, ना ही आग जला सकती है।
यानि आत्मा अमर है
फिर मौत से किस बात का डर है?
सिर्फ शरीर ही तो मरता है और
आत्मा हमेशा जिन्दा रहती है।

बावजूद इसके,
मानवता मौत से डरी हुई है।
लोग शरीर से तो जिन्दा दिखते है,
लेकिन बहुतों की आत्मा मरी हुई है।। 

Wednesday, September 26, 2018

उड़ान

जिन्दगी है तो सपने भी हैं
और सपनों में उड़ान भी।
उड़ान चिड़ियों की तरह,
या फिर बैलून की तरह?

चिड़ियाँ कोशिश करतीं हैं
अपने पंखों और
हौसले से उड़ान भरतीं हैं।
बीच बीच में रुककर,
खुले आकाश में अपनी
मर्जी से उड़तीं हैं।

लेकिन बैलून!
उसकी अपनी कोई मर्जी नहीं।
उसमें हाइड्रोजन भरकर,
एक बार, हाँ! बस एक ही बार,
 उड़ने के लिए
विवश किया जाता है
और बैलून आकाश में,
खास ऊचाई पर फट जाता है।

अब हमें तय करना है
अपनी अपनी जिन्दगी में कि
हम चिड़ियों की तरह
उड़ान भरें
या बैलून की तरह? 

नैन मिले जब नैन से

हम अच्छे हैं या बुरे, तय करता संसार।
हम देखें दो नैन से, देखें हमें हजार।।

गलत, सही जिसमें रमा, मुश्किल छूटे बैन।
बिनु बोले अनुभव वही, कह जाते हैं नैन।।

नैन मिले जब नैन से, कह दे सारी बात।
होठों के वश में नहीं, व्यक्त करे जज्बात।।

मिलन दुष्ट से हो अगर, छिन जाता है चैन।
सुजन दूर होता जहाँ, स्वतः बरसते नैन।।

कुछ ना कुछ होता सुमन, जीवन में दिन रैन।
खुशी कभी आँसू लिए, कहते रहते नैन।। 

Thursday, September 20, 2018

पीछे दौड़े आते लोग

गीत सभी के अपने अपने अपना राग सुनाते लोग
तकरीरों से खुद को ढककर दूजे को समझाते लोग

सोच किसी के भीतर कैसा क्या बाहर से दिखता है
चेहरे पे मुस्कान ओढ़कर अक्सर क्यूँ भरमाते लोग

जाल बिछाते प्यार का ऐसे ताकि कुछ सहयोग मिले
सीढ़ी सा उपयोग करे फिर तोड़ उसे बढ़ जाते लोग

दुश्मन आसानी से मिलते दोस्तों की पहचान कठिन
दोस्त-वेष में कुछ मिलते जो भीतरघात कराते लोग

फिकर छोड़कर इन बातों की आगे बढ़ते रहो सुमन
खुद की राह बना लो खुद से पीछे दौड़े आते लोग

तू सचमुच एक हिदायत हो

मैंने कब चाहा  है तुझको,
क्यों साथ हमेशा रहती हो।
मैं जितना दूर गया तुझसे,
तू पीछे पीछे चलती हो।।

ना रूप - रंग है पास मेरे,
फिर भी मुझपे तू मरती क्यों।
क्या मिलता है मुझसे, तुझको,
तू प्यार हमेशा करती क्यों।।

तुमसे मैं लड़ना भी चाहा,
पर लड़ते लड़ते हार गया।
है नाव वही, माझी भी वही,
भवसागर में पतवार गया।।

जीवन भर साथ मिला तेरा,
अब तू जीवन की आदत हो।
मैं मनमानी कर ना पाऊँ,
तू सचमुच एक हिदायत हो।।

मैं फक्र से कहता हूँ सबको,
तुझसे ही सुमन, चमन मेरा।
अब हाथ जोड़कर खड़ा प्रिये,
ऐ विपदा! तुझे नमन मेरा।।

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