Showing posts with label मुक्तक. Show all posts
Showing posts with label मुक्तक. Show all posts

Thursday, February 13, 2020

आकाश मिल गया

मर मर के जी रहे हैं कई लोग साथियों
जी भर के पी रहे हैं कई लोग साथियों
जीवन के सफर में कभी जो आसमां फटे
उसको भी सी रहे हैं कई लोग साथियों

लड़ते हैं कई लोग यहां प्यार की खातिर
जीते हैं लोग कितने तकरार की खातिर
खुशियां समेटकर के हालात को देखो
रोते हैं लोग कितने सरकार की खातिर

अंगुली की खूबसूरती, श्रृंगार अंगूठी
पहना दे एक दूजे को तो प्यार अंगूठी
कहते अगर है बचना शनि के प्रभाव से
घोड़े की नाल से बनी स्वीकार अंगूठी

कितनों को ज़िन्दगी में आकाश मिल गया
अज्ञानियों को ज्ञान का परकाश मिल गया
करते रहे हैं काम सुमन चार दशक से
उससे खुशी खुशी अब अवकाश मिल गया

Saturday, December 14, 2019

घायल हिन्दुस्तान मुसाफिर

बदल रहा परिवेश मुसाफिर
आमजनों में क्लेश मुसाफिर
यूँ  बदले  हालात  आजकल
सुलग रहा है देश मुसाफिर

          है बहुमत का जोर मुसाफिर
          संसद तक में शोर मुसाफिर
          सरकारी लालच में  फँसकर
          पत्रकार  कमजोर  मुसाफिर

मिले सभी को काम मुसाफिर
और काम  के दाम  मुसाफिर
वरना  गुरबत  पसरेगी   फिर
परिवर्तन   अंजाम   मुसाफिर

          संविधान है  शान  मुसाफिर
          लोकतंत्र की जान मुसाफिर
          विश्व-गुरू तुम घर-घर देखो
          घायल हिन्दुस्तान मुसाफिर

तज  दो  तीखे  बोल  मुसाफिर
प्रेम  बहुत  अनमोल  मुसाफिर
कोशिश करके क्यूँ नफरत के
जहर  रहे  हो  घोल  मुसाफिर
         
          पत्रकार की  पीर  मुसाफिर
          शासन की जंजीर मुसाफिर
          धीरे - धीरे   बदल   रही   है
          भारत की तस्वीर  मुसाफिर

सब सत्ता का खेल मुसाफिर
गठबन्धन अनमेल  मुसाफिर
चलो सुमन बदलो हालत को
आपस में  कर मेल मुसाफिर

Thursday, October 10, 2019

सब दिन समय अनूठा होता

कुछ कहते विपरीत समय को
सुमन मानता मीत समय को
जो इसको अनुकूल बना ले
लिया उसी ने जीत समय को

समय समय पर खोज किया कर
मुमकिन हो तो रोज किया कर
कब किसके वश में कल होता?
छोड़ो कल, इमरोज़ किया कर

समय कीमती, सब कहते हैं
कितने, समय-साथ बहते हैं
न पहचाना समय को जिसने
बोझ बने जीते रहते हैं

सीख, समय से बढ़ते जाना
और शिखर पर चढ़ते जाना
जब कुछ भी विपरीत लगे तो
उचित समय को पढ़ते जाना

सब दिन समय अनूठा होता
नहीं किसी से रूठा होता
चाल समय की जो ना समझे
समय उसी का झूठा होता

नोट - इमरोज़ = आज

Wednesday, July 17, 2019

बीज नया तू बोने दो

मेरे दिल पर राज करो
काज आज का आज करो
यूँ बतियाना आँखों से
बिन बोले आवाज करो

          जिसको कोई काम नहीं
          समझ उसे आराम नहीं
          राम नाम तो जपते पर
          कुछ के दिल में राम नहीं

जीने खातिर धंधा दो
मजदूरी नित बंधा दो
जब रोटी को जन तरसे 
रोने को फिर कंधा दो

          रोटी दोनों वक्त मिले
          कोमल चाहे सख्त मिले
          अधिकारी जो सेवक हैं
          अक्सर वो कमबख़्त मिले

जो होता है, होने दो
बीज नया तू बोने दो
खोना-पाना रोज सुमन
सोना छोड़ो, सोने दो 

Saturday, June 29, 2019

रुकना मुश्किल पाँव मुसाफिर

कभी  शहर या  गाँव मुसाफिर
रुकना मुश्किल पाँव मुसाफिर
आगे   भी   चलना   तो   खोजो
रुकने  खातिर  ठाँव  मुसाफिर

          चाहे  जितने   मोड़   मुसाफिर
          गाँव शहर को जोड़  मुसाफिर
          देश    और    मजबूत    बनेगा
          मुश्किल इसका तोड़ मुसाफिर

बदले काल-प्रभाव मुसाफिर
पूरन कहीं अभाव मुसाफिर
किसी हाल में कभी न बदले
आपस का सद्भाव मुसाफिर

          सुख सुविधा कमजोर मुसाफिर
          गाँव  प्यार  की  डोर  मुसाफिर
          कोलाहल   से    दूर   गाँव   पर
          इधर  शहर  में  शोर  मुसाफिर

कुछ गड़बड़ कुछ ठाँव मुसाफिर
चलते   छलिया   दाँव   मुसाफिर
मगर  अधिक  गाँवों  में  अब भी
मिले  दिलों  को  छाँव मुसाफिर

          सीधे - साधे  लोग  मुसाफिर
          ना ठगने  का रोग मुसाफिर
          यज्ञ किसी का अगर गाँव में
          करे लोग  सहयोग मुसाफिर

उपले  के  हैं  चित्र  मुसाफिर
है  दीवार  विचित्र   मुसाफिर
मगर  सुमन  मिलते  गाँवों में
सबके सब हैं मित्र मुसाफिर

Friday, April 5, 2019

तुम्हारी आँखों में

सारी दुनिया सिमट गयी है आज तुम्हारी आँखों में
मेरी हर खुशियों का लगता राज तुम्हारी आँखों में
मेरी लेखनी की ताकत हो गीत गजल कह पाता हूँ
उसके हर संगीत का सारा साज तुम्हारी आँखों में

डरता था पहले जब देखा ओज तुम्हारी आँखों में
अब तो मैं विचरण करता हूँ रोज तुम्हारी आँखों में
बिन तेरे खोया सा दिन है खोयी सी लगती रातें
खुद से मैं करता हूँ खुद की खोज तुम्हारी आँखों में

अक्सर देखा एक सुनहरी शाम तुम्हारी आँखों में
और देखा कि सँग राधा के श्याम तुम्हारी आँखों में
अगर अकेलापन आया तो खोया तेरी यादों में
सदा यही महसूस किया कि जाम तुम्हारी आँखों में

देखा है मस्ती के पल में तीर तुम्हारी आँखों में
विपदा की घड़ियों में देखा धीर तुम्हारी आँखों में
सबकुछ सुमन देख सकता पर तू यकीन कर ले यारा
नहीं देखना मुमकिन मुझसे नीर तुम्हारी आँखों में

Tuesday, March 19, 2019

कहाँ भरे हैं घाव मुसाफ़िर

मिटा रहे सद्भाव मुसाफ़िर
आपस में टकराव मुसाफ़िर
तब ऐसी हालत बनती जब
आता एक चुनाव मुसाफ़िर

          कौन यहाँ कमजोर मुसाफ़िर
          बढ़ा खूब है शोर मुसाफ़िर
          खुलेआम कहते मंचों से
          इक दूजे को चोर मुसाफ़िर

भूखे मरते लोग मुसाफ़िर
चले कहीं पर योग मुसाफ़िर
जो खबरों में छपी लड़ाई
वह सत्ता का रोग मुसाफ़िर

          सब चलते हैं दाव मुसाफ़िर
          वोटों के भी भाव मुसाफ़िर
          हरदम छली गयी है जनता
          कहाँ भरे हैं घाव मुसाफ़िर

लोग नहीं नादान मुसाफ़िर
रखते सबका ध्यान मुसाफ़िर
जूते की माला पहनाकर
संमव है सम्मान मुसाफ़िर

          होता जहाँ अभाव मुसाफ़िर
          मुमकिन वहीं दुराव मुसाफ़िर
          सुन अपनी आवाज़ हमेशा
          उचित कौन है ठाँव मुसाफ़िर

होली के हैं रंग मुसाफ़िर
कहीं चुनावी जंग मुसाफ़िर
सत्ता खातिर इनका लड़ना
देख सुमन है दंग मुसाफ़िर 

लेकिन ये मुमकिन है तब

खुद से खुद को गढ़ना है
फिर आगे भी बढ़ना है
लेकिन ये मुमकिन है तब
पहले खुद को पढ़ना है

नित अपना विस्तार करो
गलती को स्वीकार करो
लेकिन ये मुमकिन है तब
पहले खुद से प्यार करो

कभी नहीं नादान बनो
लोगों की मुस्कान बनो
लेकिन ये मुमकिन है तब
पहले खुद इन्सान बनो

नहीं किसी से खटपट कर
कभी नहीं तू छटपट कर
लेकिन ये मुमकिन है तब
सभी काम तू झटपट कर

बहुत जरूरत धन से जुड़
पर लोगों के मन से जुड़
लेकिन ये मुमकिन है तब
खुशबू और सुमन से जुड़

Saturday, January 12, 2019

आरक्षण का दाँव मुसाफिर

कभी रुके ना पाँव मुसाफिर
भले शहर या गाँव मुसाफिर
हर चुनाव  में  खेल  रहे सब
आरक्षण का दाँव  मुसाफिर

               राम  नाम  की  लूट मुसाफिर
               गठबंधन  की  छूट  मुसाफिर
               किस कारण से कल के साथी
               दूर  गए  अब  टूट   मुसाफिर

यूँ चलती सरकार मुसाफिर
आपस में तकरार मुसाफिर
कैसे  हुआ  खजाना   खाली
कैसा  चौकीदार  मुसाफिर

               अलग अलग हैं गीत मुसाफिर
               मगर  लक्ष्य  है जीत मुसाफिर
               हर  चुनाव   में  बना   रहे  वो
               दुश्मन  को भी मीत मुसाफिर

घर - घर जोड़े हाथ मुसाफिर
दर - दर टेके  माथ मुसाफिर
पता नहीं कब किस चुनाव में
कौन  रहेगा  साथ   मुसाफिर

               जो कहती सरकार मुसाफिर
               वही लिखे अखबार मुसाफिर
               पक्ष - विपक्षी  बन  आपस में
               हम सब करते मार मुसाफिर

भले  जीत  या हार मुसाफिर
हो आपस  में प्यार मुसाफिर
बची  रहे  मानवता घर - घर
सुमन हृदय उद्गार मुसाफिर 

खोज नया आयाम मुसाफिर

चलना  तेरा  काम मुसाफिर
तुझे  नहीं  आराम  मुसाफिर
गौर करो  कुछ राजनीति पर
खोज नया आयाम मुसाफिर

               चिल्लाते  हैं  जोर  मुसाफिर
               मचा रहे नित शोर मुसाफिर
               पक्ष - विपक्षी  इक - दूजे को
               कहते  रहते  चोर  मुसाफिर

निर्धन  जाता   टूट  मुसाफिर
धनवानों  को  छूट  मुसाफिर
भाग   रहे  जो  भाग   गये  हैं
भारत का धन लूट मुसाफिर

               सभी दलों के पक्ष मुसाफिर
               बस चुनाव है लक्ष मुसाफिर
               आमजनों में  भूख विवशता
               यही  प्रश्न  है  यक्ष मुसाफिर

भाषण  से  हमदर्द  मुसाफिर
कर्मों   से   बेदर्द    मुसाफिर
क्या  मुमकिन  ये  दूर करेंगे
जनता के सब दर्द मुसाफिर

               यह जीवन का मर्म मुसाफिर
               सब करते हैं  कर्म  मुसाफिर
               अभी  सियासत ये सिखलाती
               सबसे  ऊपर  धर्म  मुसाफिर

राष्ट्र-भक्ति  के नाम मुसाफिर
जीवन  कई  तमाम मुसाफिर
सुमन  श्रेष्ठ   सबसे   मानवता
सिखा गए यह राम मुसाफिर

Sunday, May 20, 2018

जी लो जीवन सिर्फ आज है

कहने को तो बात बहुत है
कहने की औकात बहुत है
मगर सामने जब तुम होती
लगता  ये सौगात  बहुत है

          गली - गली में झाँक रहा हूँ
          कहाँ छुपी  हो आँक रहा हूँ
          प्यार तुम्हारा नहीं मिला तो
          धूल सड़क पर फाँक रहा हूँ

इस जीवन का मूल प्यार है 
काँटों  के सँग  फूल प्यार है 
जब  वसंत उतरे  धरती पर 
तब मौसम अनुकूल प्यार है

          जिसको देखो व्यस्त दिखे हैं 
          जो थकते  वो पस्त  दिखे हैं 
          प्रियतम  की यादों  में खोयी
          वो आँखें फिर मस्त दिखे हैं

जीवन   सचमुच एक राज है
सबके  सर पे सुमन काज है 
चक्रव्यूह सा ये कल वो कल
जी लो जीवन सिर्फ आज है

कदम कदम पे मरना क्या?

जीवन  है  तो जीना सीखो, अपने कल से डरना क्या?
इसीलिए  हरदम  ये सोचो' कल से हमको करना क्या?
ये  शरीर  कुछ  दिन  जीता  पर, कर्म  हमेशा  जीता है,
होश में  जीना जीवन प्यारे, कदम कदम पे मरना क्या?

करते  करते  थक  जाओ तो, कभी कभी विश्राम करो
पल दो पल आराम मिले तो, फिर से अपना काम करो
किसको  कौन  याद रखता है, सब जीते अपनी खातिर
दुनिया  खाति र अच्छा  करके, रौशन अपना नाम करो

बड़ी - बड़ी  बातें  बस  करना, सचमुच है आसान बहुत
काट   रहे  जीवन  जो   ऐसे,  सचमुच  हैं  नादान  बहुत
बातें  जैसी, काम  भी  वैसा,  करने   में  तो  मुश्किल  है
लड़ने  खातिर उस मुश्किल से, दिल में हो अरमान बहुत

गम  के पल आने पर उसको, जीवन का तू गीत बना ले
कहीं विरोधी मिल जाएँ तो, कोशिश करके मीत बना ले 
सुख दुख का संगम ये जीवन, सुमन विकल तू मत होना
सिखलाती  है  हार  तरीका, कैसे  इसको  जीत  बना ले 

हाथों में रख हाथ चलें

भले सभी आजाद चलें
लेकिन हमसब साथ चलें
इक साधन से रोजी रोटी
हाथों में रख हाथ चलें

सच कहने का आदी हूँ
रोज पहनता खादी हूँ
मन भरमाना लोगों का
वोटों का फरियादी हूँ

हर बातों का कारण है
कर ले बात निवारण है
पहले राम धरा पर या
आया पहले रावण है

मैं इतना मजबूर नहीं
पास तुम्हारे, दूर नहीं
तुम बिन सुमन खिले कैसे
फिर जीवन मंजूर नहीं

जो कहते खुद अच्छे हैं
जीवन में कुछ कच्चे हैं
सुमन देखता दुनिया जब
लगता हम सब बच्चे हैं

Saturday, May 13, 2017

रोटी में भगवान मुसाफिर

सबके  प्रश्न  समान  मुसाफिर
क्या  होते  भगवान  मुसाफिर
बिनु अनुभव के बाँट रहे क्यों
इक - दूजे को ज्ञान मुसाफिर

               जब  संकट में जान मुसाफिर
               लुप्त वहाँ सब ज्ञान मुसाफिर
               मुँह से  अनजाने  ही  निकले
               बचा मुझे  भगवान मुसाफिर

दिल में सबका मान मुसाफिर
सबके ऊपर  ध्यान मुसाफिर
कहना  मुश्किल बुरे  वक्त में
कौन बने  भगवान  मुसाफिर

               पूजा  और  अजान  मुसाफिर
               जीवों  का बलिदान मुसाफिर
               लेकिन भूखों को बस दिखता   
               रोटी  में   भगवान   मुसाफिर

प्रायः सब अनजान मुसाफिर
छुपे कहाँ  भगवान मुसाफिर
पर मुल्ला - पंडित को उनसे
गहरी  है  पहचान  मुसाफिर

               जहाँ  विवश विज्ञान मुसाफिर  
               तब  टूटे  अभिमान  मुसाफिर
               उसी  विवशता  में  खोजो  तो
               मिल सकते भगवान मुसाफिर

कई  अरजते  ज्ञान  मुसाफिर
कोई   है  धनवान   मुसाफिर
अन्तर्मन   से  सुमन   सोचता
कविता ही भगवान मुसाफिर 

Sunday, April 30, 2017

टूटे रिश्ते जोड़ मुसाफिर

रिश्तों  में  हो प्यार मुसाफिर
ये  जीवन  आधार  मुसाफिर
पर स्वारथ में बना आजकल
रिश्ता  ही  बाजार मुसाफिर

          जब अन्दर में ज्ञान मुसाफिर
          तब रिश्तों में जान मुसाफिर
          एक   बार   जो   टूटे   रिश्ते
          बन  जाते  बेजान  मुसाफिर

प्यार करो दिल खोल मुसाफिर
सब  रिश्ते  अनमोल मुसाफिर
बुरे   वक्त   में   लोग   समझते
क्या रिश्तों  का मोल मुसाफिर

          मीठी  जिनकी बात मुसाफिर
          कहलाते अभिजात मुसाफिर
          लेकिन   मार  रहे   चुपके  से
          वो  रिश्तों को लात मुसाफिर

क्षुद्र स्वार्थ की होड़ मुसाफिर
मत रिश्ते को तोड़ मुसाफिर
इस जीवन  की सीख  यही है
टूटे   रिश्ते   जोड़   मुसाफिर

          सब रिश्तों को थाम मुसाफिर 
          सबके अपने  काम मुसाफिर
          कैसी  शिक्षा  जो  लगते  अब
          रिश्तों  के  भी दाम मुसाफिर

जब दोगे अधिकार मुसाफिर
तब रिश्तों  में प्यार मुसाफिर
मूल सुमन  रिश्तों का समझो
रिश्तों  से   संसार   मुसाफिर

सीख हार से जीत मुसाफिर

पहले पढ़ना कर्म मुसाफिर
तब लेखन है धर्म मुसाफिर
उड़ा  रहे  औरों  की रचना
लेखन में  दुष्कर्म मुसाफिर
                       
          लेखन  में  भी  वाद  मुसाफिर
          कारण बहुत विवाद मुसाफिर
          इस  विवाद में युव-जन झगड़े
          जिसका है अवसाद मुसाफिर

मिले कहीं पर धूल  मुसाफिर
और कहीं पर फूल मुसाफिर
आदम   को   इन्सान  बनाना
हो  रचना  का मूल मुसाफिर
               
          सबकी अलग दुकान मुसाफिर
          सब   खोजे   नादान  मुसाफिर
          स्वारथ   में   लेखकगण   भूले
          लेखन - कर्म  महान मुसाफिर

बड़े-बड़े  हैं  नाम  मुसाफिर
देखो उनके काम  मुसाफिर
नहीं  आचरण  लेखन-सा तो
जय जय सीताराम मुसाफिर
                                 
          प्रायोजित  सम्मान  मुसाफिर
          लेखन का अपमान मुसाफिर
          भिड़े  हुए  सब इस जुगाड़ में
          मिले कहीं जजमान मुसाफिर

सीख  हार से जीत मुसाफिर
बनो सुमन के मीत मुसाफिर
गाये   जाये   लोक - कंठ  में
लिखना  वैसा गीत मुसाफिर

नहीं हँसता नहीं मैं रो सकता

तेरे  हर  गम  को बेअसर कर दूँ
अपने जज्बात की खबर कर दूँ
नहीं मुमकिन है अब जुदा होना
अपनी  नजरें  तुझे  नजर कर दूँ

          नहीं हिम्मत तुझे मैं खो सकता
          और  दूजे का  भी न हो सकता
          फिर ये कैसी तेरी शिकायत जो
          नहीं  हँसता  नहीं  मैं रो सकता

मुझको  तेरी  बहुत जरूरत है
बन्द  आँखों  में  तेरी  सूरत है
तुझे  देखूँ  खुली पलक से तो
मेरी खातिर वो शुभ मुहुरत है

          प्यार   की   चाहतें   अधूरी  है
          पास  होकर जो दिल से दूरी है
          आतीं जातीं हैं उलझनें लेकिन
          प्यार   करना  बहुत  जरूरी  है

तुझे पाने को हर जतन होगा
जहाँ तुम होगी मेरा मन होगा
आईना जब तुझे चिढ़ाने लगे
तेरे  पीछे  खड़ा  सुमन  होगा 

अभियान जिन्दगी

जो  कुछ मिला है मुझको, मंजूर जिन्दगी 
लेकिन  कभी  है पास, कभी दूर जिन्दगी 
कोशिश  किए  बिना  ही, जो लोग रो रहे
उनके  लिए  तो  सचमुच, नासूर जिन्दगी

 कुछ  लोग  जीते ऐसे, अभिमान जिन्दगी 
कुछ  दे  रहे  हैं मुफ्त में, ही जान जिन्दगी 
जीवन  के  फलसफे  से, है सीखना जिसे 
उनके लिए  तो लगता, अभियान ज़िन्दगी

कर  लो विचार ठीक  से, है जोश जिन्दगी 
लेकिन  कई   तो   जीते,  बेहोश  जिन्दगी 
लेखन  तभी  सफल जो, बेहोश जग सकें 
जी  ले  सम्भल  के  यारों, है होश जिन्दगी

जब  आसमाँ   खुला  है,  संसार  जिन्दगी 
कितनों  की  दिख रही है, लाचार जिन्दगी 
दहशत  कहीं पे यारों, नफरत  के बीज भी 
लेकिन सुमन की खातिर, है  प्यार जिन्दगी

प्यार नहीं व्यापार किया है

तुमने मुझको मान दिया है
जीने का अभियान दिया है
किस्मत से ही खुशी सुमन को
नूतन जीवन-दान दिया है

बसा लिया जब तुझको मन में
सब कुछ बदला है जीवन में
सुमन के दिल में कई कुतुहल
खुशियाँ पसरीं हैं आँगन में

मैंने कितना प्यार किया है
दिखे जहाँ व्यवहार किया है
सुमन देख दुनिया में प्रायः
प्यार नहीं व्यापार किया है

हँसी तुम्हारी खनक लिये है
चेहरे पर भी चमक लिये है
सुमन सिसकता यहाँ बैठकर
लगता सारी महक लिये है

नहीं चैन से अब सोता हूँ
बोझ देह का ज्यों ढोता हूँ
सुमन हँसी है लोक-लाजवश
अन्दर ही अन्दर रोता हूँ

Saturday, March 12, 2016

दुश्मन सा व्यवहार करो

इक मुझपे उपकार करो
दुश्मन सा व्यवहार करो
दुनिया समझे अलग हुए
पर चुपके से प्यार करो

प्यार समझ के हर्ष हुआ
पाने को संघर्ष हुआ
नहीँ मिला तो कोशिश कर
प्यार मिला उत्कर्ष हुआ

हरदम तुझको याद करूँ
खुशियों को आबाद करूं
तुम मूरत बन पत्थर की
तुमसे नित फरियाद करूं

ऊबड-खाबड, समतल है
सोना चाहे पीतल है
सुमन प्यार में जीते जो
उसकी दुनिया शीतल है
हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!