रिश्ता बहुत पुराना, यादें पुरानी दे दो
धरती तरस रही है, कुछ तो निशानी दे दो
पिघलो जरा ऐ बादल, रोना शुरू करो तुम
प्यासी धरा पे सबकी, आँखों में पानी दे दो
अपनी जो है निराशा, किसको दिखा रहे हो
शायद यही हताशा, किसको दिखा रहे हो
अक्सर जो बोलते हैं, वो खाक प्यार करते
ये प्यार क्या तमाशा, किसको दिखा रहे हो
पनघट पे कोई कैसे, प्यासा ही मर रहा है
कितनों के आसमाँ छत, ऐसा भी घर रहा है
इन्सान ही तो अक्सर, रुख मोड़ते हवा का
जालिम का सर झुका दे, ऐसा भी सर रहा है
बच्चे बिना जो आँगन, सूना बहुत लगे हैं
बिन फूल जैसे गुलशन, सूना बहुत लगे हैं
तालाब, कुएं सूखे, नदियाँ सिकुड़ रहीं हैं
पानी बिना ये जीवन, सूना बहुत लगे हैं
अपनों से हो जुदाई, रहना बहुत कठिन है
आँसू भरे हैं दिल में, बहना बहुत कठिन है
रस्मो - रिवाज कैसे, सोचे सुमन अकेला
बेटी की हो विदाई, सहना बहुत कठिन है

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