Sunday, May 20, 2012

बच्चे घर से दूर

आँगन सूना घर हुआ, बच्चे घर से दूर।
मजदूरी करने गया, छोड़ यहाँ मजबूर।।

जल्दी से जल्दी बनें, कैसे हम धनवान।
हम कुदाल बनते गए, दूर हुई संतान।।

ऊँचे पद संतान की, कहते भर के जोश।
पर दूरी सन्तान से, सोच बिगड़ता होश।।

कहाँ मिला कुछ आसरा, वृद्ध हुए माँ बाप।
ले जाना हो सँग तो, मातु पिता अभिशाप।।

जैसी भी है जिन्दगी, करो सुमन स्वीकार।
शायद जीवन को मिले एक नया विस्तार।।

12 comments:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

कहाँ मिला कुछ आसरा, वृद्ध हुए माँ बाप।
कहीं सँग ले जाय तो, मातु पिता अभिशाप।।

जैसी भी है जिन्दगी, करो सुमन स्वीकार।
शायद जीवन को मिले एक नया विस्तार।।


बहुत सुंदर ,अच्छी प्रस्तुति

RECENT POST काव्यान्जलि ...: किताबें,कुछ कहना चाहती है,....

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

जैसी भी है जिन्दगी, करो सुमन स्वीकार।
शायद जीवन को मिले एक नया विस्तार।।

वाह ,,,, बहुत सुंदर रचना,,

RECENT POST काव्यान्जलि ...: किताबें,कुछ कहना चाहती है,....

गुड्डोदादी said...

कहाँ मिला कुछ आसरा, वृद्ध हुए माँ बाप।
कहीं सँग ले जाय तो, मातु पिता अभिशाप।।

आज घर घर की यही कहानी
माँ बाप के आँखों में बहता पानी

ब्लॉग बुलेटिन said...

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - बामुलिहाज़ा होशियार …101 …अप शताब्दी बुलेट एक्सप्रेस पधार रही है

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर कविता, जीवन को यथा स्वीकार कर उसमें सर्वश्रेष्ठ ढूढ़ें..

विनोद सैनी said...

शानदार प्रस्‍तुती यहा भी पधारे yunik27.blogspot.com

गुड्डोदादी said...

श्यामल
आशीर्वाद
फेसबुक पर

Hariom Tripathi, Ashok Ray, Brij Pruthi and 2 others like this..

Rajiv Taneja शायद जीवन को मिले एक नया विस्तार
दहेज में जो मिले लंबी.......मर्सडीस कार
9 hours ago · Unlike · 1.

Abdulaziz Abid जल्दी मिल्लिओनेर बन्ने का कहब हवा चिकना चूर
9 hours ago · Like.


Deepa Sharma dadi nice 1
9 hours ago · Unlike · 1.

शेइला गुड्डो दादी राजीव बेटा जी आशीर्वाद मर्सडीज़ दहेज में हो रही बेकार
समय आ रहा लैम्बर गीनी गाड़ी के सपने होनगे साकार
8 hours ago · Like.

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

बहुत बढ़िया सर!

सादर

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार २२ /५/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी |

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत सुन्दर रचना..
बढिया प्रस्तुति:-)

Roshi said...

bahut sarthak bahv..........

Sunil Shukla said...

बहुत ख़ूब👌👌

हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!