कभी खोता में जाना है, कभी गोता लगाना है
तेरी मर्जी क्यों जनता को, अभी तोता बनाना है
अभी है रात पूनम की, अमावस भी तो आएगी
तुम्हारे दर्प के दीपक को, मिलकर के बुझाना है
मिली ताकत तुझे उसको, पचाना सीख लो प्यारे
वगरना देश से सारे, सिकन्दर को भगाना है
यही इतिहास कहता कि, तुझे है प्यार लाशों से
बता लाशों का फिर से क्या, नया डेरा लगाना है
सभी को हक सुमन बोलें, उसे तुम बात कहने दो
डरे तुम जिन सवालों से, उसे फिर से उठाना है

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