साधो! बिन मौसम के ओले।
चुप हैं जिन्दा लोग घरों में, मुर्दे फिर क्या बोले??
साधो! बिन -----
खुद से घोषित खुद फकीर अब, राजा हिन्दुस्तानी।
जो फकीर सचमुच के दुख में, देख देख मनमानी।
बदहाली यूँ आमजनों मेॅ, इधर - उधर बस डोले।।
साधो! बिन। -----
धर्म - परायण इस माटी के, लोग हैं सीधे - सादे।
जिनको शासक ने भरमाया, करके झूठे वादे।
सीखा ठोकर से हमने क्या, असली - नकली चोले??
साधो! बिन -----.
सुमन विरोधी नहीं किसी का, केवल प्रेम-पुजारी।
राह दिखाने की कोशिश बस, जो समाज हितकारी।
कलम-धर्म जो समय समय पर, ऑंखें सबकी खोले।।
साधो! बिन -----

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