Thursday, October 10, 2019

काम नहीं चलता रोने से

जी कर  मरने  या मर - मर के, जीने में कुछ अन्तर है
खुश दिख जाए वो चेहरों से, लेकिन आँख समन्दर है

जो  कुछ हमको मिला हुआ है, उससे ऐसा जी भरता
नहीं  मिला  जो  उसको  पाने, जादू - टोना - मन्तर है

दिल  में  जोश  बनाए रखना, जरा होश भी रख लेना
यार  कभी  ऐसा  मत  सोचो, तू  ही  एक सिकन्दर है

विज्ञापन  में  चमक - दमक है, पर शासन विज्ञापन से
शासन की जो आज व्यवस्था, दिखता वहाँ भगन्दर है

काम  नहीं  चलता  रोने  से,  बाँधो  मुट्ठी,  चिल्लाओ
जो  तकलीफ  तुम्हारे  अन्दर, वही सुमन के अन्दर है

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